सन्धि



जब दो वर्ण एक-दूसरे के बहुत पास आते हैं, तो उनके मिलने से जो बदलाव या विकार आता है, उसे सन्धि कहते हैं।

👉सरल शब्दों में: दो अक्षरों के पास आने पर होने वाले मेल या परिवर्तन को सन्धि कहा जाता है।


संहिता

👉सन्धि होने के लिए वर्णों का अत्यंत पास होना जरूरी है। इसी अत्यंत निकटता को व्याकरण में 'संहिता' कहा जाता है।

✨✨सूत्र: "परः सन्निकर्षः संहिता" (वर्णों की अत्यधिक निकटता ही संहिता है)।✨✨


संहिता (सन्धि) कहाँ जरूरी है और कहाँ इच्छा पर निर्भर है?

एक प्रसिद्ध श्लोक के अनुसार, सन्धि के नियम इस प्रकार हैं:

   1. एक पद में: सन्धि करना अनिवार्य है।

   2. उपसर्ग और धातु के बीच: सन्धि करना अनिवार्य है।

   3. समास में: सन्धि करना अनिवार्य है।

   4. वाक्य  में: यह बोलने वाले की इच्छा (विवक्षा) पर निर्भर करता है कि वह सन्धि करना चाहता है या नहीं।


सन्धि में क्या-क्या बदलाव (परिवर्तन) होते हैं?

👉जब दो वर्ण आपस में मिलते हैं, तो मुख्य रूप से 6 तरह के बदलाव देखे जा सकते हैं:

   1. दोनों वर्णों की जगह एक नया वर्ण आना: जैसे – सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ मिलकर 'ओ' बन गया)।

   2. केवल पहले वर्ण में बदलाव होना: जैसे – प्रति + एक = प्रत्येक (इ की जगह 'य्' हो गया)।

   3. किसी एक वर्ण का गायब (लोप) हो जाना: जैसे – देवः + अत्र = देवोऽत्र (विसर्ग का रूप बदल जाना या लोप होना)।

   4. किसी एक वर्ण का डबल (द्वित्व) हो जाना: जैसे – तस्मिन् + अवसरे = तस्मिन्नवसरे (न दो बार हो गया)।

   5. दोनों वर्णों में एक साथ बदलाव आना: जैसे – उत् + श्वास = उच्छ्वास।

   6. दोनों वर्णों के बीच में कोई नया वर्ण आ जाना: जैसे – अनु + छेद = अनुच्छेद (बीच में 'च्' आ गया)।


सन्धि के प्रकार 

सन्धि मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है:

| 1. स्वर सन्धि (अच् सन्धि ) :-  स्वर वर्ण + स्वर वर्ण |

| 2. व्यञ्जन सन्धि (हल् सन्धि) :-  व्यञ्जन + स्वर या व्यञ्जन + व्यञ्जन |

| 3. विसर्ग सन्धि  (विसर्ग सन्धि) :-   विसर्ग (ः) + स्वर या व्यञ्जन |


स्वर सन्धि (अच् सन्धि)

जब दो स्वर वर्ण आपस में मिलते हैं और उनसे जो बदलाव होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं। इसके कई भेद होते हैं, जिनमें से पहला मुख्य भेद नीचे दिया गया है:

1. दीर्घ सन्धि 

👉सूत्र: "अकः सवर्णे दीर्घः"

👉नियम: यदि पहले शब्द के अंत में अ, इ, उ, ऋ (ह्रस्व या दीर्घ) आए और दूसरे शब्द के शुरू में भी वही समान (सवर्ण) स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ (बड़ा) स्वर (आ, ई, ऊ, ॠ) बन जाते हैं।


👉दीर्घ सन्धि का नियम चार्ट:👇👇

✨अ / आ + अ / आ = आ

✨इ / ई + इ / ई = ई

✨ उ / ऊ + उ / ऊ = ऊ

✨ऋ / ॠ + ऋ / ॠ = ॠ


👉दीर्घ सन्धि के प्रमुख उदाहरण 

(क) 'आ' वाले उदाहरण (अ/आ + अ/आ = आ):


✨परम + अर्थ = परमार्थ (म का 'अ' + 'अ' = आ)

✨देव + आलय = देवालय (व का 'अ' + 'आ' = आ)

✨विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (द्या का 'आ' + 'अ' = आ)

✨महा + आशय = महाशय (हा का 'आ' + 'आ' = आ)

✨शास्त्र + आगार = शस्त्रागार


(ख) 'ई' वाले उदाहरण (इ/ई + इ/ई = ई):


✨कवि + इन्द्र = कवीन्द्र (वि की 'इ' + 'इ' = ई)

✨मुनि + ईश = मुनीश (नि की 'इ' + 'ई' = ई)

✨मही + इन्द्र = महीन्द्र (ही की 'ई' + 'इ' = ई)

✨नदी + ईश = नदीश (दी की 'ई' + 'ई' = ई)

✨गिरि + ईश = गिरीश


(ग) 'ऊ' वाले उदाहरण (उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ):


✨भानु + उदय = भानूदय (नु का 'उ' + 'उ' = ऊ)

✨लघु + ऊर्मि = लघूर्मि (घु का 'उ' + 'ऊ' = ऊ)

✨वधू + उत्सव = वधूत्सव (धू का 'ऊ' + 'उ' = ऊ)

✨भू + ऊर्जा = भूर्जा (भू का 'ऊ' + 'ऊ' = ऊ)

✨साधु + उक्तम् = साधूक्तम्


(घ) 'ॠ' वाले उदाहरण (ऋ + ऋ = ॠ):


✨ पितृ + ऋणम् = पितृणम् (तृ का 'ऋ' + 'ऋ' = ॠ)

✨मातृ + ऋद्धि = मातृद्धि

✨ होतृ + लकारः = होतृकारः (यहाँ ऋ और ऋ मिलकर दीर्घ ऋ बनते हैं)