संधि पार्ट २ : गुण संधि से पूर्वरूप संधि तक

 गुण सन्धि

👉संज्ञा सूत्र: अदेङ् गुणः (यह बताता है कि 'अ', 'ए', 'ओ' को गुण कहते हैं)।

👉विधि सूत्र (सन्धि कार्य): आद्गुणः

👉परिभाषा: यदि 'अ' या 'आ' के बाद ह्रस्व या दीर्घ 'इ, उ, ऋ, ऌ' आए, तो दोनों के स्थान पर क्रमशः 'ए, ओ, अर्, अल्' गुण एकादेश हो जाता है।

👉(उच्चारण स्थान नियम): 'अ' का स्थान कण्ठ है और 'इ' का तालु, इसलिए दोनों मिलकर कण्ठ-तालु वाला 'ए' बनते हैं। 'उ' का ओष्ठ होने के कारण 'अ+उ' मिलकर कण्ठ-ओष्ठ वाला 'ओ' बनते हैं। 'ऋ' के साथ 'उरण् रपरः' सूत्र से 'अर्' होता है।


 उदाहरण:

   1. अ / आ + इ / ई = ए

   ✨नर + इन्द्र = नरेन्द्र (र का 'अ' + 'इ' = 'ए')

   ✨ज्ञान + ईश = ज्ञानेश ('अ' + 'ई' = 'ए')

   ✨ महा + इन्द्र = महेन्द्र ('आ' + 'इ' = 'ए')

   ✨ राका + ईश = राकेश ('आ' + 'ई' = 'ए')


   2. अ / आ + उ / ऊ = ओ

   ✨ चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय (द्र का 'अ' + 'उ' = 'ओ')    

   ✨जल + ऊर्मि = जलोर्मि ('अ' + 'ऊ' = 'ओ')

   ✨महा + उत्सव = महोत्सव ('आ' + 'उ' = 'ओ')

   ✨गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि ('आ' + 'ऊ' = 'ओ')


   3. अ / आ + ऋ = अर्

   ✨राज + ऋषि = राजर्षि (ज का 'अ' + 'ऋ' = 'अर्')

     ✨ वर्षा + ऋतु = वर्षर्तु ('आ' + 'ऋ' = 'अर्')


   4. अ / आ + ऌ = अल्

   ✨मम + लकार = ममलकार (म का 'अ' + 'ऌ' = 'अल्')


वृद्धि सन्धि 

👉संज्ञा सूत्र: वृद्धिरादैच् (यह बताता है कि 'आ', 'ऐ', 'औ' को वृद्धि कहते हैं)।

👉विधि सूत्र (सन्धि कार्य): वृद्धिरेचि

👉परिभाषा: यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आए तो दोनों मिलकर 'ऐ' हो जाते हैं। और यदि 'ओ' या 'औ' आए तो दोनों के स्थान पर 'औ' वृद्धि एकादेश हो जाता है।


उदाहरण:

   1. अ / आ + ए / ऐ = ऐ


   ✨एक + एक = एकैक (क का 'अ' + 'ए' = 'ऐ')


   ✨तथा + एव = तथैव ('आ' + 'ए' = 'ऐ')


   ✨देव + ऐश्वर्यम् = देवैश्वर्यम् ('अ' + 'ऐ' = 'ऐ')


   ✨ महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य ('आ' + 'ऐ' = 'ऐ')


   2. अ / आ + ओ / औ = औ


   ✨परम + ओजस्वी = परमौजस्वी (म का 'अ' + 'ओ' = 'औ')


   ✨महा + ओषधि = महौषधि ('आ' + 'ओ' = 'औ')


   ✨ कृष्ण + औत्कण्ठ्यम् = कृष्णौत्कण्ठ्यम् ('अ' + 'औ' = 'औ')


   ✨ महा + औदार्यम् = महौदार्यम् ('आ' + 'औ' = 'औ')


यण् सन्धि

👉मुख्य सूत्र: इको यणचि


👉 परिभाषा: यदि 'इक्' प्रत्याहार (इ/ई, उ/ऊ, ऋ, ऌ) के बाद कोई भी 'अच' यानी असमान स्वर (अपने से अलग स्वर) आए, तो 'इक्' के स्थान पर क्रमशः 'यण्' (य, व, र, ल) आदेश हो जाता है।


👉विशेष ध्यान दें (नोट): दीर्घ या गुण सन्धि की तरह यहाँ दोनों स्वर मिलकर एक नहीं होते, बल्कि सिर्फ पहले वाले स्वर (इक्) की जगह बदलाव (य, व, र, ल) होता है। बाद वाला स्वर वैसा का वैसा ही रहता है और जुड़ जाता है।


उदाहरण:


   1. इ / ई + असमान स्वर = य्

   ✨ प्रति + एकम् = प्रत्येकम् (त की 'इ' बदल गई 'य्' में, आगे 'ए' जुड़ गया)

   ✨ अति + आचारः = अत्याचारः ('इ' का 'य्' + 'आ')

   ✨देवी + अपराधः = देव्यपराधः ('ई' का 'य्' + 'अ')

   ✨ नदी + उद्गमः = नद्युद्गमः ('ई' का 'य्' + 'उ')


   2. उ / ऊ + असमान स्वर = व्

   ✨ अनु + अयः = अन्वयः (न का 'उ' बदल गया 'व्' में, आगे 'अ' जुड़ गया)

   ✨सु + आगतम् = स्वागतम् ('उ' का 'व्' + 'आ')

   ✨वधू + आगमनम् = वध्वागमनम् ('ऊ' का 'व्' + 'आ')

   ✨खतु + एतत् = खल्वेतत् ('उ' का 'व्' + 'ए')


   3. ऋ + असमान स्वर = र्

   ✨मातृ + आनन्दः = मात्रानन्दः (त का 'ऋ' बदला 'र्' में, त् + र् मिलकर 'त्र' बना)

    ✨पितृ + उपदेशः = पित्रुपदेशः ('ऋ' का 'र्' + 'उ' = त्रु)


   4. ऌ + असमान स्वर = ल्

   ✨ऌ + आकारः = लाकारः ('ऌ' पूरा का पूरा 'ल्' में बदला + 'आ')

   ✨ऌ + अनुबन्धः = लनुबन्धः ('ऌ' का 'ल्' + 'अ')


अयादि संधि

👉यह संधि तब होती है जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई दूसरा स्वर आता है।

👉सूत्र: एचोऽयवायावः

नियम:

👉ए के बाद स्वर आए तो वह अय् बनता है।

👉ऐ के बाद स्वर आए तो वह आय् बनता है।

👉ओ के बाद स्वर आए तो वह अव् बनता है औ के बाद स्वर आए तो वह आव् बनता है।

उदाहरण : 

✨ने + अनम् = नयनम् (ए + अ = अय्)

✨चे + अनम् = चयनम् (ए + अ = अय्)

✨गै + अकः = गायकः (ऐ + अ = आय्)

✨नै + अकः = नायकः (ऐ + अ = आय्)

✨पो + अनः = पवनः (ओ + अ = अव्)

✨भो + अनम् = भवनम् (ओ + अ = अव्)

✨पौ + अकः = पावकः (औ + अ = आव्)

✨नौ + इकः = नाविकः (औ + इ = आव् + इ)


पूर्वरूप संधि

👉जब पहले शब्द के अंत में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद छोटा 'अ' आए, तो 'अ' अपना रूप खो देता है। उसकी जगह 'ऽ' (अवग्रह) का चिह्न लग जाता है।

👉सूत्र: एङः पदान्तादत

नियम:

👉ए + अ = एऽओ + अ = ओऽ 

उदाहरण:

✨ते + अपि = तेऽपि

✨हरे + अव = हरेऽव

✨विष्णो + अत्र = विष्णोऽत्र

✨प्रभो + अनुगृहाण = प्रभोऽनुगृहाण