प्रतिष्ठित 35वें सरस्वती सम्मान 2025 के लिए प्रसिद्ध बंगाली लेखक रामकुमार मुखोपाध्याय को चुना गया है। के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा उन्हें यह सम्मान उनके वर्ष 2020 में प्रकाशित बंगाली उपन्यास 'हरा पार्वती कथा' (Hara Parbati Katha) के लिए दिया गया है, जो संस्कृति, पौराणिक कथाओं और समाज के विषयों को दर्शाता है।



संस्थापक: के. के. बिड़ला फाउंडेशन (स्थापना 1991 )


पुरस्कार राशि: ₹15,00,000 नकद, एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका (स्मृति चिन्ह)

सरस्वती सम्मान का इतिहास

सरस्वती सम्मान (Saraswati Samman) भारत का एक प्रमुख साहित्यिक पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1991 में के. के. बिड़ला फाउंडेशन (K. K. Birla Foundation) द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति के लिए दिया जाता है।

प्रथम सरस्वती सम्मान

1991 में पहला सरस्वती सम्मान प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन को उनकी चार-खंडीय आत्मकथा के लिए दिया गया था। इसके चार भाग थे:

क्या भूलूँ क्या याद करूँ

नीड़ का निर्माण फिर

बसेरे से दूर

दशद्वार से सोपान तक