तत्पुरुष समास
👉परिभाषा : जिस समास में उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें प्रथम पद (पूर्व पद) द्वितीय पद के विशेषण के रूप में कार्य करता है। समास करने पर पूर्व पद की विभक्तियों का लोप हो जाता है।
👉 सूत्र: 'प्रायेण उत्तरपदप्रधानः तत्पुरुषः'
तत्पुरुष समास के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं:
1. समानाधिकरण तत्पुरुष (कर्मधारय): जहाँ दोनों पदों में समान विभक्ति (प्रथमा) होती है।
2. व्यधिकरण तत्पुरुष: जहाँ दोनों पदों में अलग-अलग विभक्तियाँ होती हैं। इसके 6 उपभेद (द्वितीया से सप्तमी तक) हैं:
(क) द्वितीया तत्पुरुष
👉नियम: जब पूर्व पद में द्वितीया विभक्ति हो और उत्तर पद में श्रित, अतीत, पतित, गत, अत्यस्त, प्राप्त, आपन्न आदि शब्द हों।
✨ उदाहरण (विग्रह = सामासिक पद):
✨कृष्णं श्रितः = कृष्णश्रितः (कृष्ण के आश्रित)
✨ दुःखं अतीतः = दुःखातीतः (दुःख से परे)
✨ ग्रामं गतः = ग्रामगतः (गाँव को गया हुआ)
✨ कूपं पतितः = कूपपतितः (कुएँ में गिरा हुआ)
✨ सुखं प्राप्तः = सुखप्राप्तः (सुख को प्राप्त)
(ख) तृतीया तत्पुरुष
👉नियम: जब पूर्व पद तृतीया विभक्ति में हो और उत्तर पद हीन, शून्य, सदृश, सम, उन (कम), या कलह आदि शब्दों से युक्त हो।
👉उदाहरण:
✨ बाणेन विद्धः = बाणविद्धः (बाण से घायल)
✨ हरुणा त्रातः = हरित्रातः (हरि द्वारा रक्षित)
✨ ज्ञानेन हीनः = ज्ञानहीनः (ज्ञान से रहित)
✨ मात्रे सदृशः = मातृसदृशः (माता के समान)
✨ वाचा कलहः = वाक्कलहः (वाणी से झगड़ा)
(ग) चतुर्थी तत्पुरुष
👉नियम: जब पूर्व पद में चतुर्थी विभक्ति हो और वह पद उत्तर पद के लिए कोई सामग्री (तदर्थ), हित, सुख, रक्षित या बलि को दर्शाता हो।
👉 उदाहरण:
✨ यूपाय दारु = यूपदारु (यज्ञ के खंभे के लिए लकड़ी) (UP-TET Special)
✨गवे हितम् = गोहितम् (गाय के लिए हितकर)
✨ भूतेभ्यः बलिः = भूतबलिः (भूतों/जीवों के लिए बलि) (PYQ)
✨ ब्राह्मणाय हितम् = ब्राह्मणहितम् (ब्राह्मण के लिए हितकर)
✨ धनाय कामना = धनकामना (धन के लिए इच्छा)
(घ) पञ्चमी तत्पुरुष
👉 नियम: जब पूर्व पद पञ्चमी विभक्ति में हो और उससे भय, डर, मुक्ति, पतन या अलगाव का बोध हो (भय, भीत, भीति, अपेत, मुक्त, पतित शब्दों के योग में)।
👉 उदाहरण:
✨चोरात् भयम् = चोरभयम् (चोर से डर) (Very Important)
✨ सिंहात् भीतः = सिंहभीतः (सिंह से डरा हुआ)
✨ वृक्षात् पतितः = वृक्षपतितः (वृक्ष से गिरा हुआ)
✨ बंधनात् मुक्तः = बंधनमुक्तः (बंधन से मुक्त)
✨स्वर्गात् पतितः = स्वर्गपतितः (स्वर्ग से गिरा हुआ)
(ङ) षष्ठी तत्पुरुष
नियम: जब दो पदों के बीच संबंध (का, की, के) दर्शाया जाए और पूर्व पद में षष्ठी विभक्ति हो।
उदाहरण:
✨राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः (राजा का पुरुष/सेवक) (सदाबहार प्रश्न)
✨ देवस्य पूजा = देवपूजा (देव की पूजा)
✨ विद्यायाः आलयः = विद्यालयः (विद्या का घर)
✨ गंगायाः जलम् = गंगाजलम् (गंगा का जल)
✨ पशूनां पतिः = पशुपतिः (पशुओं का स्वामी)
(च) सप्तमी तत्पुरुष
👉नियम: जब पूर्व पद में सप्तमी विभक्ति हो और उत्तर पद में शौण्ड (चतुर), कुशल, प्रवीण, निपुण, पंडित, श्रेष्ठ या मग्न जैसे शब्द आएं।
👉 उदाहरण:
✨अक्षेषु शौण्डः = अक्षशौण्डः (पासे के खेल में चतुर)
✨ कार्ये कुशलः = कार्यकुशलः (कार्य में कुशल)
✨ युद्धे निपुणः = युद्धनिपुणः (युद्ध में निपुण)
✨ मुनिषु श्रेष्ठः = मुनिश्रेष्ठः (मुनियों में श्रेष्ठ)
✨ जले मग्नः = जलमग्नः (जल में डूबा हुआ) (नया उदाहरण)
तत्पुरुष समास के अन्य प्रमुख उपभेद
1. नञ् तत्पुरुष समास
👉नियम: जब निषेध या अभाव के अर्थ में पूर्व पद में 'न' अव्यय आए। यदि 'न' के बाद कोई व्यंजन हो, तो 'न' का 'अ' हो जाता है। यदि 'न' के बाद कोई स्वर हो, तो 'न' का 'अन्' हो जाता है।
👉उदाहरण:
✨न इच्छा = अनिच्छा (इच्छा न होना)
✨ न उचितम् = अनुचितम् (जो उचित न हो)
✨न सत्यम् = असत्यम् (जो सत्य न हो)
✨ न ईश्वरः = अनीश्वरः (जो ईश्वर न हो)
✨ न गतः = अगतः (जो न गया हो)
2. प्रादि या गति तत्पुरुष समास
👉नियम: जब पूर्व पद में कु, प्र, सु, निर आदि उपसर्ग या गतिसंज्ञक शब्द आएं और वे विशिष्ट अर्थ प्रकट करें।
👉उदाहरण:
✨ कुत्सितः पुत्रः = कुपुत्रः (बुरा पुत्र)
✨शोभनः पुरुषः = सुपुरुषः (अच्छा पुरुष)
✨प्रगतः आचार्यः = प्राचार्यः (श्रेष्ठ आचार्य) (PYQ)
3. उपपद तत्पुरुष समास
👉 नियम: जब उत्तर पद कोई ऐसी क्रिया/धातु हो जो स्वतंत्र रूप से प्रयोग न होकर पूर्व पद के साथ मिलकर ही पद बनाती हो (जैसे: कार, ज्ञ, द)।
👉उदाहरण:
✨कुम्भं करोति इति = कुम्भकारः (घड़ा बनाने वाला/कुम्हार)
✨ धनं ददाति इति = धनदः (धन देने वाला)
✨ शास्त्रं जानाति इति = शास्त्रज्ञः (शास्त्र जानने वाला)
✨ पंके जायते इति = पंकजम् (कीचड़ में उत्पन्न होने वाला/कमल)
4. अलुक् तत्पुरुष समास
👉 नियम: इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; वह सामासिक पद बनने के बाद भी सुरक्षित रहती है।
👉उदाहरण:
✨आत्मने पदम् = आत्मनेपदम्
✨ परस्मै पदम् = परस्मैपदम्
✨युधि स्थिरः = युधिष्ठिरः (युद्ध में स्थिर रहने वाला) (Most Important)
✨सरसि जायते इति = सरसिजम् (तालाब में उत्पन्न कमल)
कर्मधारय समास (समानाधिकरण तत्पुरुष)
👉परिभाषा: जहाँ दोनों पदों (पूर्व पद और उत्तर पद) में एक ही विभक्ति (प्रथमा) होती है। इसमें मुख्य रूप से विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध होता है।
👉सूत्र: 'तत्पुरुषः समानाधिकरणः कर्मधारयः'
(क) विशेषण-विशेष्य कर्मधारय
👉उदाहरण:
✨कृष्णः सर्पः = कृष्णसर्पः (काला सांप) (PYQ)
✨ महान् च असौ देवः = महादेवः (महान देव)
✨ नीलम उत्पलम् = नीलोत्पलम् (नीला कमल)
✨ सुंदरः बालकः = सुंदरबालकः (सुंदर लड़का)
उपमान-उपमेय कर्मधारय
👉उदाहरण:
✨ घन इव श्यामः = घनश्यामः (बादल के समान काला)
✨ चन्द्र इव मुखम् = चन्द्रमुखम् (चन्द्रमा के समान मुख)
✨ पुरुषः सिंह इव = पुरुषसिंहः (सिंह के समान वीर पुरुष)
✨ मुखं कमलम् इव = मुखकमलम् (कमल रूपी मुख)

No comments:
Post a Comment