विसर्ग संधि
जब विसर्ग (ः) के बाद किसी स्वर या व्यंजन वर्ण के आने पर विसर्ग के स्थान में जो भी परिवर्तन (विकार) होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। विसर्ग हमेशा किसी न किसी स्वर के ठीक बाद ही आता है (जैसे: रामः में 'म' के 'अ' के बाद विसर्ग)।
सत्व संधि
👉 प्रमुख सूत्र: विसर्जनीयस्य सः (8.3.34)
👉नियम: यदि विसर्ग (ः) के बाद 'खर' प्रत्याहार (प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा अक्षर: क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ तथा श, ष, स) आए, तो विसर्ग बदलकर 'स्' हो जाता है।
इसके अंतर्गत वर्णों के अनुसार निम्नलिखित विशेष बदलाव होते हैं:
(i) च् या छ् आने पर (श्चत्व नियम)
👉 विसर्ग के बाद यदि 'च' या 'छ' आए, तो पहले विसर्ग का 'स्' होता है, फिर वह श्चुत्व संधि के नियम से 'श्' (शलगम वाला) बन जाता है।
👉 सूत्र नियम: विसर्ग (ः) + च/छ = श्
👉 उदाहरण:
✨ निः + चलम् = निश्चलम्
✨ कः + चित् = कश्चित्
✨ रामः + चलति = रामश्चलति
✨हर : + च = हरश्च
✨ गौः + चरति = गौश्चरति
(ii) ट् या ठ् आने पर (ष्टुत्व नियम)
विसर्ग के बाद यदि 'ट' या 'ठ' आए, तो विसर्ग का 'स्' बदलकर 'ष्' (षट्कोण वाला) हो जाता है।
👉 सूत्र नियम: विसर्ग (ः) + ट/ठ = ष्
👉उदाहरण:
✨ धनुः + टंकारः = धनुष्टंकारः
✨ रामः + टीकते = रामष्टीकते
✨ कः + टीका = कष्टीका
(iii) त् या थ् आने पर
विसर्ग के बाद यदि 'त' या 'थ' आए, तो विसर्ग सीधे 'स्' (सपेरा वाला) में बदलता है।
👉 सूत्र नियम: विसर्ग (ः) + त/थ = स्
👉उदाहरण:
✨नमः + ते = नमस्ते
✨ मनः + तापः = मनस्तापः
✨ विष्णुः + त्राता = विष्णुस्त्राता
✨ इतः + ततः = इतस्ततः
(iv) श्, ष्, स् आने पर (विकल्प नियम)
👉 सूत्र: वा शरि (8.3.36)
👉 नियम: यदि विसर्ग के बाद श, ष, स आए, तो विसर्ग या तो वैसा ही रहता है या आधे 'श्, ष्, स्' में बदल जाता है (दोनों रूप सही हैं)।
👉 उदाहरण:
👉 हरिः + शेते = हरिःशेते अथवा हरिश्रेते
👉 निः + सन्देहः = निःसन्देहः अथवा निस्सन्देहः
रुत्व संधि
प्रमुख सूत्र: ससजुषो रुः (8.2.66)
नियम: पद के अंत में स्थित 'स' और 'सजुष्' के 'ष' के स्थान पर 'रु' (र्) आदेश हो जाता है। इस 'रु' के उ की इत्संज्ञा होकर लोप हो जाता है और केवल 'र्' शेष बचता है।
👉 उदाहरण:
मुनिः + आगच्छति = मुनिर आगच्छति = मुनिरोगच्छति
कविः + अयम् = कविरयम्
भानुः + उदेति = भानुरुदेति
निः + धनम् = निर्धनम्
दुः + भाग्य = दुर्भाग्य
उत्व संधि
उत्व संधि के दो प्रमुख नियम परीक्षाओं में सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं:
नियम (A) सूत्र: अतो रोरप्लुतादप्लुते
👉 नियम: यदि विसर्ग से पहले भी छोटा 'अ' हो और विसर्ग के बाद भी छोटा 'अ' हो, तो विसर्ग को 'उ' हो जाता है। यह 'उ' पूर्व वाले 'अ' से मिलकर गुण संधि द्वारा 'ओ' बन जाता है और बाद वाले 'अ' के स्थान पर अवग्रह (ऽ) का चिह्न लग जाता है।
👉 उदाहरण:
✨ शिवः + अर्च्यः = शिवोऽर्च्यः
✨ देवः + अपि = देवोऽपि
✨ कः + अपि = कोऽपि
✨प्रथमः + अध्यायः = प्रथमोऽध्यायः
नियम (B) सूत्र : हशि च
👉 नियम: यदि विसर्ग से पहले छोटा 'अ' हो और बाद में 'हश्' प्रत्याहार (वर्गों के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण तथा य, र, ल, व, ह) हो, तो विसर्ग 'ओ' में बदल जाता है (यहाँ अवग्रह 'ऽ' नहीं लगता)।
👉 उदाहरण:
✨ मनः + रथः = मनोरथः
✨ नमः + नमः = नमो नमः
✨ बालः + हसति = बालो हसति
✨ तपः + वनम् = तपोवनम्
✨ मनः + हरः = मनोहरः
✨ यश : + दा = यशोदा
रलोप एवं पूर्वदीर्घ संधि (र-लोप)
👉प्रमुख सूत्र: रो रि (8.3.14) तथा ढ्रलोपे पूर्वस्य दीर्घोऽणः (6.3.111)
👉नियम: यदि 'र्' के बाद दोबारा 'र्' आए, तो पहले वाले 'र्' का लोप (गायब) हो जाता है। इसके साथ ही, लोप होने वाले 'र्' से तुरंत पहले आने वाले छोटे स्वर (अ, इ, उ) को दीर्घ (आ, ई, ऊ) कर दिया जाता है।
👉उदाहरण:
✨ पुनर् + रमते = पुना रमते (अ का आ हो गया)
✨ हरिर् + रम्यः = हरी रम्यः (इ का ई हो गया)
✨ गुरुर् + रुष्टः = गुरू रुष्टः (उ का ऊ हो गया)
✨ निः + रोगः = निर + रोगः = नीरोगः
✨ नि + रसः = निर + रसः = नीरसः
रेफ को विसर्ग
👉प्रमुख सूत्र: खरवसानयोर्विसर्जनीयः (8.3.15)
👉नियम: यदि पद के अंत में 'र्' (रेफ) हो और उसके बाद या तो 'खर' प्रत्याहार (वर्ग का 1, 2 वर्ण या श, ष, स) हो या वाक्य का अंत (अवसान) हो रहा हो, तो उस 'र्' को पुनः विसर्ग (ः) में बदल दिया जाता है।
👉उदाहरण:
✨ रामर् + खादति = रामः खादति
✨ पुनर् + पुना = पुनः पुनः
✨ भ्रातर् + पाहि = भ्रातः पाहि

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