संस्कृत क्लास : 08
पिछली क्लास के कुछ बचे हुए टॉपिक
✨✨महत्वपूर्ण वर्गीकरण (प्रत्याहार के आधार पर):✨✨
खर् प्रत्याहार (विवार, श्वास, अघोष):
👉इसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ग का पहला, दूसरा वर्ण और श, ष, स आते हैं।
👉वर्ण: ख, फ, छ, ठ, थ, च, ट, त, क, प, श, ष, स।
👉सूत्र: "खरो विवाराः श्वासा अघोषाश्च"
हश् प्रत्याहार (संवार, नाद, घोष):
👉 इसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण और ह, य, र, ल, व आते हैं।
👉वर्ण: ग, घ, ङ, ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, ह, य, र, ल, व।
👉सूत्र: "हशः संवारा नादा घोषाश्च"
4. अल्पप्राण
👉अर्थ: 'प्राण' का अर्थ वायु है। जिस वर्ण को बोलने में मुख से कम वायु बाहर फेंकनी पड़े, उसे अल्पप्राण कहते हैं।
👉अल्पप्राण वर्ण:
✨प्रत्येक वर्ग का प्रथम, तृतीय और पञ्चम वर्ण (1, 3, 5)
✨यण् वर्ण (य, र, ल, व)
👉सूत्र: "वर्गाणां प्रथम-तृतीय-पञ्चमाः यणश्चाल्पप्राणाः"
✨✨✨कुल संख्या: 19 व्यंजन वर्ण (5 वर्ग × 3 वर्ण = 15 + 4 अन्तस्थ वर्ण)।✨✨✨
व्याकरणशास्त्र की प्रमुख संज्ञाएँ एवं परिभाषाएँ
1. वृद्धि संज्ञा
👉सूत्र: वृद्धिरादैच्
👉पहचान: आ, ऐ, औ — इन तीन वर्णों को 'वृद्धि' संज्ञक वर्ण कहा जाता है।
✉️उदाहरण: एकैकम् (क में 'ऐ' की मात्रा है) जलौघः (ल में 'औ' की मात्रा है) तथैव (थ में 'ऐ' की मात्रा है)
✨नोट: ध्यान रखें, 'वृद्धिरेचि' संधि का सूत्र है, जबकि संज्ञा का सूत्र 'वृद्धिरादैच्' है।
2. गुण संज्ञा
👉सूत्र: अदेङ् गुणः
👉पहचान: अ, ए, ओ — इन तीन वर्णों की 'गुण' संज्ञा होती है।
✉️उदाहरण: उपेन्द्रः (प में 'ए' की मात्रा है) महोत्सवः (ह में 'ओ' की मात्रा है) देवर्षिः (व में 'अ' और र् की ध्वनि है)
3. संयोग संज्ञा
👉सूत्र: हलोऽनन्तराः संयोगः
👉परिभाषा: जब दो या दो से अधिक व्यंजनों (हल्) के बीच में कोई स्वर (अच्) न आए, तो उन व्यंजनों के आपस में मिलने को 'संयोग' कहते हैं।
✉️उदाहरण:
👉महत्त्व (त् + त् + व का संयोग)
👉इन्द्र (न् + द् + र का संयोग)
👉सूर्य (र् + य का संयोग)
4. अनुनासिक संज्ञा
👉सूत्र: मुखनासिकावचनोऽनुनासिकः
👉परिभाषा: जो वर्ण मुख और नासिक (नाक) दोनों की सहायता से बोले जाते हैं, उनकी अनुनासिक संज्ञा होती है।
👉उदाहरण: हाँ , माँ (चन्द्रबिन्दु वाले शब्द) वाङ् मयम् (ङ और म अनुनासिक वर्ण हैं)
✉️विशेष: जो वर्ण केवल नासिका से नहीं बल्कि मुख और नासिका दोनों से बोले जाएँ, वही अनुनासिक हैं (जैसे वर्ग के ५वें अक्षर)।
5. सवर्ण संज्ञा
👉सूत्र: तुल्यास्यप्रयत्नं सवर्णम्
👉परिभाषा: जिन दो या दो से अधिक वर्णों का उच्चारण स्थान और आभ्यन्तर प्रयत्न दोनों समान (एक जैसे) होते हैं, वे आपस में 'सवर्ण' कहलाते हैं।
✉️उदाहरण:
👉कवि + ईशः = कवीशः (इ और ई सवर्ण हैं) भानु + उदयः = भानूदयः (उ और ऊ सवर्ण हैं) पितृ + ऋणम् = पितृणम् (ऋ और ऋ सवर्ण हैं)
6. प्रगृह्य संज्ञा
👉सूत्र: ईदूदेद् द्विवचनं प्रगृह्यम्
👉परिभाषा: द्विवचन के अन्त में आने वाले ई (दीर्घ ई), ऊ (दीर्घ ऊ), और ए की 'प्रगृह्य' संज्ञा होती है। (इनके बाद संधि कार्य नहीं होता)।
✉️उदाहरण:
👉कवी इमौ (कवी द्विवचन है, अंत में 'ई' है) साधू अत्र (साधू द्विवचन है, अंत में 'ऊ' है) लते एते (लते द्विवचन है, अंत में 'ए' है)
7. 'घ' संज्ञा
👉सूत्र: तरप्तमपौ घः
👉परिभाषा: 'तरप' (comparative degree - जैसे उच्चतर) और 'तमप' (superlative degree - जैसे उच्चतम) इन दो प्रत्ययों की 'घ' संज्ञा होती है।
✉️उदाहरण: लघुतरः (तरप प्रत्यय) / लघुतमः (तमप प्रत्यय)
उच्चतरः (तरप प्रत्यय) / उच्चतमः (तमप प्रत्यय)
8. निष्ठा संज्ञा
👉सूत्र: क्तक्तवतू निष्ठा
👉परिभाषा: 'क्त' और 'क्तवतु' इन दो भूतकालिक प्रत्ययों की 'निष्ठा' संज्ञा होती है।
✉️उदाहरण: गतः (क्त) / गतवान् (क्तवतु) , कृतः (क्त) / कृतवान् (क्तवतु) , लिखितः (क्त) / लिखितवान् (क्तवतु)
9. सर्वनाम संज्ञा
👉सूत्र: सर्वादीनि सर्वनामानि
👉परिभाषा: 'सर्व' आदि शब्दों (जैसे- सर्व, विश्व, उभ, यत्, तत् आदि) की 'सर्वनाम' संज्ञा होती है।
✉️उदाहरण : अयम्, इयम्, इदम् (यह)सः, सा, तत् (वह)अस्मद्, युष्मद् (मैं, तुम)
To be continued.....!!!!!!!

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