लाला लाजपत राय न केवल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सक्रिय सदस्य रहे, बल्कि वे इसके सर्वोच्च पद यानी अध्यक्ष पद पर भी आसीन हुए थे।

लाला लाजपत राय और कांग्रेस से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:

• गरम दल के प्रमुख नेता: 19वीं सदी के अंत में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए थे। वह कांग्रेस के भीतर बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर 'लाल-बाल-पाल' की प्रसिद्ध राष्ट्रवादी तिकड़ी के रूप में जाने जाते थे, जो पूर्ण स्वराज और स्वदेशी आंदोलनों के समर्थक थे।

• कांग्रेस के अध्यक्ष: वर्ष 1920 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में आयोजित कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में उन्हें सर्वसम्मति से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा कांग्रेस का अध्यक्ष (President) चुना गया था।

• असहयोग आंदोलन का नेतृत्व: उनकी ही अध्यक्षता वाले इसी ऐतिहासिक कलकत्ता अधिवेशन में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) के प्रस्ताव को कांग्रेस द्वारा स्वीकार और पारित किया गया था।

वह देश के शीर्ष कांग्रेस नेताओं में से एक थे जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के लिए कई बार जेल यात्राएं कीं और अंततः 1928 में साइमन कमीशन का शांतिपूर्ण विरोध करते हुए अंग्रेजों के लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल होने के बाद देश के लिए अपना बलिदान दे दिया।

बाल गंगाधर तिलक (23 जुलाई 1856 – 1 अगस्त 1920), जिन्हें पूरा देश आदर से 'लोकमान्य' (जनता द्वारा स्वीकृत) कहता है, भारत के एक महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारी उन्हें "भारतीय अशांति का जनक" (Father of the Indian Unrest) कहते थे।


1. स्वराज का नारा

तिलक पूर्ण स्वशासन (स्वराज) के सबसे पहले और मुखर समर्थकों में से एक थे। उन्होंने वह ऐतिहासिक नारा दिया जिसने करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति की आग फूंक दी:

"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा!"

2. 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी और नेतृत्व

तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर गरम दल के प्रमुख नेता थे।

• वे कांग्रेस के नरम दल की 'याचिका और प्रार्थना' की नीति के खिलाफ थे। उन्होंने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया।

• उन्होंने पंजाब के लाला लाजपत राय और बंगाल के विपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर प्रसिद्ध 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी बनाई, जिसने आजादी के आंदोलन को एक आक्रामक और नई दिशा दी।

3. पत्रकारिता को बनाया हथियार

जनता को जगाने और ब्रिटिश शासन की नीतियों को बेनकाब करने के लिए उन्होंने 1881 में दो प्रसिद्ध समाचार पत्र शुरू किए:

• केसरी (Kesari): मराठी भाषा में निकलने वाला यह अखबार आम जनता से जुड़ने का माध्यम बना।

• महरत्ता / मराठा (Mahratta): अंग्रेजी भाषा में निकलने वाला यह अखबार अंग्रेजी पढ़े-लिखे वर्ग और सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए था।

• केसरी में लिखे उनके तीखे लेखों के कारण अंग्रेजों ने उन पर कई बार राजद्रोह का मुकदमा चलाया। उन्हें 1908 से 1914 तक 6 साल के लिए बर्मा (म्यांमार) की मांडले जेल में भी बंद रखा गया था।

4. सार्वजनिक उत्सवों की शुरुआत (सांस्कृतिक राष्ट्रवाद)

अंग्रेज सरकार ने राजनीतिक सभाओं पर रोक लगा रखी थी। इस पाबंदी को तोड़ने और लोगों को एक साथ लाने के लिए तिलक ने दो पारंपरिक उत्सवों को बड़े सार्वजनिक आयोजनों में बदल दिया:

• गणेश उत्सव (1893): घरों में होने वाली गणेश पूजा को सार्वजनिक मंचों पर लाकर उन्होंने समाज के सभी वर्गों के भेदभाव को मिटाया और राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

• शिवाजी जयंती (1895): छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य को याद कर युवाओं में साहस और अन्याय के खिलाफ लड़ने की भावना जगाने के लिए इसकी शुरुआत की गई।

5. मांडले जेल में साहित्यिक रचनाएँ

जब तिलक मांडले जेल में बंद थे, तब उन्होंने वहां गहन अध्ययन किया और दो प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं:

• गीता रहस्य: भगवद्गीता पर लिखी गई इस टिप्पणी में उन्होंने कर्मयोग पर जोर दिया, ताकि भारतीय अपने अधिकारों के लिए कर्म (संघर्ष) करने से पीछे न हटें।

• द आर्कटिक होम इन द वेदास (The Arctic Home in the Vedas): इस किताब में उन्होंने वेदों और आर्यों के मूल निवास स्थान के बारे में अपनी अनूठी थ्योरी दी।

6. होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement)

जेल से रिहा होने के बाद, उन्होंने 1916 में एनी बेसेंट के साथ मिलकर अखिल भारतीय होम रूल लीग की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारत के लिए स्वशासन (Self-governance) प्राप्त करना था, जिसने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आजादी की लड़ाई को फिर से जीवित कर दिया।

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक जन-आंदोलन बनाने में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें "आधुनिक भारत का निर्माता" कहा था।