द्विगु समास



👉परिभाषा: जिस कर्मधारय समास का पहला पद संख्यावाचक (नंबर) हो और वह पूरे पद के माध्यम से किसी समूह (समाहार) का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। यह प्रायः नपुंसकलिंग एकवचन या स्त्रीलिंग में होता है।

👉 सूत्र: 'संख्यापूर्वी द्विगुः'

👉 उदाहरण:

✨ पञ्चानां गवां समाहारः = पञ्चगवम् (पांच गायों का समूह) (PYQ)

✨ पञ्चानां वटानां समाहारः = पञ्चवटी (पांच वट वृक्षों का समूह)

✨ त्रयाणां लोकानां समाहारः = त्रिलोकी (तीन लोकों का समूह)

✨ चतुर्णां फलानां समाहारः = चतुर्फलम् (चार फलों का समूह)

✨ अष्टानां अध्यायानां समाहारः = अष्टाध्यायी (आठ अध्यायों का समूह - पाणिनी कृत)

✨ नवानां रात्रीणां समाहारः = नवरात्रम् (नौ रात्रियों का समूह)


द्वंद्व समास

👉परिभाषा: जिस समास में उभय पद (दोनों पद) प्रधान होते हैं। विग्रह करते समय पदों के बीच में 'च' (और) का प्रयोग होता है।

👉 सूत्र: 'उभयपदप्रधानः द्वन्द्वः', 'चार्थे द्वन्द्वः'

👉इसके तीन मुख्य भेद हैं:

   1. इतरेतर द्वंद्व: जहाँ दोनों पदों का अपना अलग-अलग अस्तित्व स्पष्ट होता है। वचन पदों की संख्या के अनुसार होता है।

✨ रामः च कृष्णः च = रामकृष्णौ (राम और कृष्ण) (द्विवचन)

✨सीता च रामः च = सीतारामौ (सीता और राम)

✨ पत्रं च पुष्पं च फलं च = पत्रपुष्पफलानि (पत्ता, फूल और फल) (बहुवचन)


   2. समाहार द्वंद्व: जहाँ दोनों पद मिलकर एक समूह या समुदाय का बोध कराते हैं। यह हमेशा नपुंसकलिंग एकवचन में होता है।


 ✨ पाणी च पादौ च एषां समाहारः = पाणिपादम् (हाथ और पैर का समूह) 

✨भेरी च पटहः च एतयोः समाहारः = भेरीपटहम् (भेरी और नगाड़े का समूह)


   3. एकशेष द्वंद्व: जहाँ दो पदों में से केवल एक ही पद शेष बचता है (प्रायः पुल्लिंग पद शेष रहता है और द्विवचन में आता है)।

   ✨माता च पिता च = पितरौ (माता और पिता) 

✨दुहिता च पुत्रः च = पुत्रौ (पुत्री और पुत्र)

✨मयूरी च मयूरः च = मयूरौ (मोरनी और मोर)


बहुव्रीहि समास

👉परिभाषा: जिस समास में न तो पूर्व पद प्रधान होता है और न ही उत्तर पद, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) पद की ओर संकेत करते हैं (विशेषण बनते हैं), उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

👉 सूत्र: 'अनेकम् अन्यपदार्थे', 'प्रायेण अन्यपदप्रधानो बहुव्रीहिः'

(क) समानाधिकरण बहुव्रीहि (दोनों पदों में समान विभक्ति)

 उदाहरण:

✨ पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः (पीले हैं वस्त्र जिसके अर्थात - श्रीकृष्ण/विष्णु)

  (ध्यान दें: यदि 'पीतम् अम्बरम्' आए तो कर्मधारय होगा, लेकिन विसर्गयुक्त 'पीताम्बरः' आए तो बहुव्रीहि होगा)

✨ लम्बं उदरं यस्य सः = लम्बोदरः (लम्बा है उदर जिनका अर्थात - गणेश जी)

✨ प्राप्तं उदकं यं सः = प्राप्तोदकः (जिस ग्राम को जल प्राप्त हो चुका हो)

✨ जित्तानि इन्द्रियाणि येन सः = जितेन्द्रियः (जिसने इंद्रियों को जीत लिया हो - मुनि)

(ख) व्यधिकरण बहुव्रीहि (दोनों पदों में अलग-अलग विभक्ति)

👉 उदाहरण:

✨ चक्रं पाणौ यस्य सः = चक्रपाणिः (हाथ में चक्र है जिसके अर्थात - विष्णु) (PYQ)

✨ वीणा पाणौ यस्याः सा = वीणापाणिः (हाथ में वीणा है जिनके अर्थात - सरस्वती)

✨ चन्द्रः शेखरे यस्य सः = चन्द्रशेखरः (मस्तक पर चन्द्रमा है जिनके अर्थात - शिव)


(ग) व्यतिहार बहुव्रीहि (लड़ाई-झगड़े या युद्ध का बोध कराने वाले पद)

👉 उदाहरण:

✨ केशेषु केशेषु गृह्णित्वा इदं युद्धं प्रवृत्तम् = केशाकेशि (बालों को पकड़कर लड़ा गया युद्ध)

✨हस्ताभ्यां हस्ताभ्यां प्रहृत्य इदं युद्धं प्रवृत्तम् = हस्ताहस्ति (हाथों-हाथों से हुई लड़ाई)


(घ) तुल्ययोग या सह बहुव्रीहि (साथ का बोध कराने वाले)

👉उदाहरण:

✨ अर्जुनेन सह = सार्जुनः (अर्जुन के साथ)

✨ पुत्रेण सह = सपुत्रः (पुत्र के साथ)

✨ भार्यया सह = सभार्यः (पत्नी के साथ)