'उच्चारण स्थान'
मुख का वह भाग जहाँ से किसी विशेष वर्ण को बोलते समय जिह्वा (जीभ) या वायु स्पर्श करती है। पाणिनीय शिक्षा के अनुसार मुख्य रूप से 8 उच्चारण स्थान माने गए हैं, लेकिन सूत्रों के माध्यम से इन्हें 11 प्रमुख श्रेणियों में समझा जाता है।
1. कण्ठ
✨सूत्र: "अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः"
✨व्याख्या: इस स्थान से बोले जाने वाले वर्णों को कण्ठ्य वर्ण कहते हैं।
✨शामिल वर्ण:
👉अ, आ (दोनों स्वर)
👉क = पूरा क-वर्ग (क, ख, ग, घ, ङ)
👉ह (ऊष्म व्यंजन)
👉विसर्ग ( ः )
2. तालु (मुख की छत का पिछला भाग)
✨सूत्र: "इचुयशानां तालु"
✨व्याख्या: इनसे निकलने वाली ध्वनियों को तालव्य वर्ण कहा जाता है।
शामिल वर्ण:
👉इ, ई
👉च = पूरा च-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ)
👉य (अन्तःस्थ व्यंजन)
👉श (तालव्य शकार)
3. मूर्धा (मुख की छत का अगला/कठोर भाग)
✨सूत्र: "ऋटुरषाणां मूर्धा"
✨व्याख्या: इन्हें मूर्धन्य वर्ण कहा जाता है। इन्हें बोलते समय जीभ ऊपर की ओर मुड़ती है।
शामिल वर्ण:
👉ऋ, ॠ
👉टु = पूरा ट-वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण)
👉र (अन्तःस्थ व्यंजन)
👉ष (मूर्धन्य षकार)
4. दन्त (Teeth)
✨सूत्र: "लृटुलसानां दन्ताः"
✨व्याख्या: इन्हें दन्त्य वर्ण कहते हैं। इन्हें बोलते समय जीभ दांतों को छूती है।
✨शामिल वर्ण:
👉ऌ (स्वर)
👉त = पूरा त-वर्ग (त, थ, द, ध, न)
👉ल (अन्तःस्थ व्यंजन)
👉स (दन्त्य सकार)
5. ओष्ठ (Lips)
✨सूत्र: "उपूपध्मानीयानाम् ओष्ठौ"
✨व्याख्या: इन्हें ओष्ठ्य वर्ण कहा जाता है। इन्हें बोलते समय दोनों होठों का मेल होता है।
✨शामिल वर्ण:
👉उ, ऊ
👉प = पूरा प-वर्ग (प, फ, ब, भ, m)
👉उपध्मानीय (प और फ से पहले आने वाला आधा विसर्ग)
6. नासिका (Nose)
✨सूत्र: "ञमङणनानां नासिका च"
✨व्याख्या: प्रत्येक वर्ग का पंचम वर्ण अपने मूल उच्चारण स्थान के साथ-साथ नासिका से भी बोला जाता है। इसीलिए सूत्र में 'च' (और) लगा है।
✨शामिल वर्ण:
👉ञ, म, ङ, ण, न (इनका दोहरा उच्चारण स्थान होता है, जैसे 'ङ' का कण्ठ + नासिका)।
संयुक्त उच्चारण स्थान (Double Articulation)
🟥कुछ वर्ण दो अंगों की सहायता से बोले जाते हैं:
7. कण्ठ-तालु
✨सूत्र: "एदैतोः कण्ठतालु"
✨व्याख्या: ये वर्ण कण्ठ और तालु दोनों से मिलकर उच्चारित होते हैं।
✨शामिल वर्ण:
👉 ए, ऐ (चूँकि 'ए' अ + इ से मिलकर बनता है, इसलिए अ का कण्ठ और इ का तालु मिलकर कण्ठतालु बनते हैं)।
8. कण्ठ-ओष्ठ
✨सूत्र: "ओदौतोः कण्ठोष्ठम्"
✨व्याख्या: ये वर्ण कण्ठ और होठों की सहायता से बोले जाते हैं।
✨शामिल वर्ण:
👉ओ, औ (चूँकि 'ओ' अ + उ से बनता है, इसलिए कण्ठ + ओष्ठ)।
9. दन्त-ओष्ठ
✨सूत्र: "वकारस्य दन्तोष्ठम्"
✨व्याख्या: यह परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल एक ही वर्ण आता है।
✨शामिल वर्ण:
👉व (दांत और होठों के मेल से बोला जाता है)।
कुछ अतिरिक्त उच्चारण स्थान
10. जिह्वामूल
✨सूत्र: "जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम्"
✨शामिल वर्ण:
👉ᳲक और ᳲख (क और ख से पहले आने वाला आधा विसर्ग)।
11. केवल नासिका
✨सूत्र: "नासिका अनुस्वारस्य"
✨शामिल वर्ण:
👉अनुस्वार ( ं ) का उच्चारण केवल नासिका से होता है।
उच्चारण स्थान का एक अन्य नियम
🟧 'उरः' (हृदय) का विशेष नियम
👉जब 'ह' वर्ण या पंचम वर्ण (ङ, ञ, ण, न) किसी अन्य व्यंजन के साथ संयुक्त होकर आते हैं, तब उनका उच्चारण स्थान कण्ठ न होकर 'उरः' (हृदय/छाती) माना जाता है।उदाहरण: 'अपराह्न' शब्द में 'ह' का उच्चारण स्थान उरः होगा, केवल कण्ठ
नहीं।

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