वर्ण विचार 



भाषा की वह सबसे छोटी इकाई (Unit) जिसके और टुकड़े या खंड नहीं किए जा सकते, उसे वर्ण या अक्षर कहते हैं।


 जैसे: अ, इ, क्, ख्, प् आदि।


 2. वर्णों के भेद 

संस्कृत व्याकरण में वर्ण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:


   1. स्वर (अच्)

   2. व्यंजन (हल्)


🟥 स्वर (अच्)

जिन वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। माहेश्वर सूत्रों के अनुसार संस्कृत में स्वरों की कुल संख्या 9 मानी गई है।

स्वरों को तीन भागों में बांटा गया है:


👉 ह्रस्व स्वर (मूल स्वर): जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय (सबसे कम समय) लगता है। ये 5 हैं: अ, इ, उ, ऋ, ऌ

👉 दीर्घ स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में दो मात्रा का समय (ह्रस्व से दोगुना) लगता है। ये 4 हैं (इन्हें संयुक्त स्वर भी कहते हैं क्योंकि ये दो अलग स्वरों से मिलकर बनते हैं):

 ए, ऐ, ओ, औ

 

✨✨नोट: सामान्य संस्कृत में आ, ई, ऊ, ॠ को मिलाकर कुल 13 स्वर भी माने जाते हैं, लेकिन व्याकरण के मूल सूत्रों में मुख्य 9 स्वर ही हैं)।✨✨


👉 प्लुत स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्रा का समय लगे (जैसे किसी को दूर से पुकारने में)। इसके आगे ३ का अंक लिखा जाता है, जैसे: ओ३म्।



🟩 व्यंजन (हल्)


जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकता और जिन्हें बोलने के लिए स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। संस्कृत में मूल व्यंजनों की कुल संख्या 33 है।

व्यंजनों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:


क) स्पर्श व्यंजन (वर्गीय व्यंजन)

इन्हें मुख के अलग-अलग अंगों को छूकर बोला जाता है। ये कुल 25 होते हैं और इन्हें 5 वर्गों में बांटा गया है (इसीलिए इन्हें वर्गीय व्यंजन कहते हैं):


क (क-वर्ग): क, ख, ग, घ, ङ

च (च-वर्ग): च, छ, ज, झ, ञ

ट (ट-वर्ग): ट, ठ, ड, ढ, ण

त (त-वर्ग): त, थ, द, ध, न

प (प-वर्ग): प, फ, ब, भ, म


ख) अन्तःस्थ व्यंजन

इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच का सा होता है। यण् प्रत्याहार वाले ये 4 वर्ण हैं:


य, व, र, ल


ग) ऊष्म व्यंजन

इन वर्णों को बोलते समय मुख से गर्म हवा निकलती है। शल् प्रत्याहार वाले ये 4 वर्ण हैं:


श, ष, स, ह



🟪 अयोगवाह

ये वे वर्ण हैं जो न तो पूरी तरह स्वर हैं और न ही व्यंजन, लेकिन भाषा में उपयोग होते हैं। ये 4 प्रकार के होते हैं:


👉अनुस्वार: वर्ण के ऊपर लगने वाली बिंदु (जैसे: मं)

👉विसर्ग: वर्ण के पीछे लगने वाली दो बिंदियां (जैसे: रामः)

👉जिह्वमूलीय: ᳲक और ᳲख से पहले आने वाला आधा विसर्ग जैसा चिह्न 

👉 उपध्मानीय: प और फ से पहले आने वाला आधा विसर्ग जैसा चिह्न (प, फ)


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Radhe Radhe 😊❤️

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