मार्च 2026 में घोषित 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार (वर्ष 2025 के लिए) के लिए प्रसिद्ध तमिल कवि और लेखक आर. वैरामुथु (R. Vairamuthu) को चुना गया है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार का इतिहास
ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award) भारत का साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च और प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान माना जाता है। इसकी शुरुआत भारतीय भाषाओं के उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से हुई थी।
🔹 शुरुआत और इतिहास
स्थापना: 1961 में
पहला पुरस्कार: 1965 में प्रदान किया गया।
प्रायोजक संस्था: भारतीय ज्ञानपीठ
यह पुरस्कार भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं के साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है।
पुरस्कार के साथ प्रशस्ति-पत्र, वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा और 11 लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाती है।
शुरुआती वर्षों में पुरस्कार किसी एक विशिष्ट साहित्यिक कृति के लिए दिया जाता था, जबकि बाद में इसे साहित्यकार के समग्र साहित्यिक योगदान के आधार पर दिया जाने लगा।
🏆 पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार
1965 में मलयालम के प्रसिद्ध साहित्यकार जी. शंकर कुरुप (G. Sankara Kurup) को पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
हिंदी भाषा का प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार सुमित्रानंदन पंत को वर्ष 1968 में प्रदान किया गया था।
चिदंबरा — कृति के लिए उन्हें 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला

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