⚜️भारत शासन अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935)⚜️➡️➡️



•1930-32 में लंदन में हुए तीन गोलमेज सम्मेलनों में संवैधानिक सुधारों से संबंधित संस्तुतियों के फलस्वरूप इस अधिनियम का निर्माण किया गया। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-


•भारत में सर्वप्रथम संघीय शासन प्रणाली की नींव रखी गई। संघ की दो इकाइयाँ थीं- ब्रिटिश भारतीय प्रांत तथा देशी रियासतें।


•केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना अर्थात् केंद्र तथा राज्य इकाइयों के मध्य शक्तियों का विभाजन किया गया (तीन सूचियों के अंतर्गत) -संघ सूची, प्रांत सूची तथा समवर्ती सूर्ची।


•संघ सूची में 59 विषय, प्रांत सूची में 54 विषय और समवर्ती सूची में 36 विषय शामिल किये गए तथा अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर जनरल में निहित थीं (संघीय सूची में- विदेशी कार्य, मुद्रा, नौसेना, थल सेना, वायुसेना, जनगणना जैसे विषय थे। प्रांतीय सूची में पुलिस, प्रांतीय लोक सेवा और शिक्षा। समवर्ती सूची में दंड विधि और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया, विवाह एवं विवाह-विच्छेद आदि सम्मिलित थे।


•प्रांतों में दैध शासन को समाप्त कर दिया गया तथा प्रांतीय स्वायत्तता का प्रावधान किया गया।


•इसके तहत 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना हुई।


•इस अधिनियम द्वारा 'भारत परिषद' को समाप्त कर दिया गया एवं विवादों के निपटारे के लिये संघीय न्यायालय की स्थापना की गई जो अंतिम न्यायालय नहीं था, अंतिम अपीलीय न्यायालय 'प्रिवी काउंसिल' था।


•बर्मा (वर्तमान म्यांमार) को भारत से (1937 में) अलग कर दिया गया।*


•प्रांतीय विधानमंडलों का विस्तार किया गया। प्रांतों में 11 में से 6 विधानमंडलों में दो सदनों की व्यवस्था की गई (6 प्रांत असम, बंगाल, बिहार, बंबई, मद्रास एवं संयुक्त प्रांत)।


•इसके अंतर्गत मुद्रा और साख पर नियंत्रण के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की गई।


•इसने दलित जातियों, महिलाओं और मज़दूर वर्ग के लिये अलग से निर्वाचन की व्यवस्था की।

•मताधिकार का विस्तार हुआ। लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या को मत का अधिकार प्राप्त हुआ।


•इसने न केवल फेडरल लोक सेवा आयोग की स्थापना की, बल्कि प्रांतीय सेवा आयोग और दो या दो से अधिक राज्यों के लिये संयुक्त सेवा आयोग की भी स्थापना की।


➡️✅नोटः 1935 का भारत शासन अधिनियम जुलाई 1936 में लागू हुआ और इसके प्रावधानों के आधार पर 1937 में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को 5 स्थानों पर पूर्ण बहुमत, असम तथा पश्चिमोत्तर प्रांत में कांग्रेस की मिली-जुली सरकार, पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी, बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी और सिंध में मुस्लिम लीग की सरकार बनी।


⚜️क्रिप्स मिशन, 1942 (Cripps Mission, 1942)⚜️


क्रिप्स मिशन सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत भेजा गया एक मिशन था जिसका उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अपने लिये भारत का पूर्ण सहयोग प्राप्त करना था। चर्चिल ने 11 मार्च, 1942 को क्रिप्स मिशन की घोषणा की और 22 मार्च, 1942 को क्रिप्स मिशन (एकल प्रतिनिधि) भारत पहुँचा।


क्रिप्स प्रस्ताव की मुख्य विशेषताएँ अधोलिखित थीं-


क्रिप्स ने घोषणा की कि भारत में ब्रिटिश नीति का उद्देश्य है. जितनी जल्द संभव हो सके, भारत में स्वशासन की स्थापना अर्थात् युद्ध के बाद भारत को 'डोमिनियन स्टेटस' दिया जाएगा।


युद्ध के बाद एक ऐसे भारतीय संघ के निर्माण का प्रयत्न किया जाएगा जिसे पूर्ण उपनिवेश का दर्जा प्राप्त होगा और उसे राष्ट्रकुल से अलग होने का अधिकार भी होगा।


युद्ध के बाद एक संविधान निर्मात्री सभा का गठन किया जाएगा जिसमें ब्रिटिश प्रांतों के चुने हुए प्रतिनिधि तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


संविधान सभा द्वारा निर्मित किये गए संविधान को सरकार दो शर्तों पर ही लागू कर सकेगी-


जो प्रांत इससे सहमत नहीं होंगे वे इसे अस्वीकार कर पूर्ववत् स्थिति में रह सकते हैं या फिर वे पूर्णतया स्वतंत्र रहना चाहते हैं तब भी ब्रिटिश सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। पाकिस्तान की मांग के लिये इस व्यवस्था के तहत गुंजाइश बनाई गई।


भारतीय संविधान सभा तथा ब्रिटिश सरकार के मध्य अल्पसंख्यकों के हितों (यथा- सुरक्षा, आश्वासन, प्रतिनिधित्व व विकास आदि) को लेकर एक समझौता होगा।युद्ध के दौरान ब्रिटिश वायसराय की एक नई कार्यकारी परिषद का गठन किया जाएगा, जिसमें भारतीय जनता के प्रमुख वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, लेकिन रक्षा मंत्रालय ब्रिटिश नेतृत्व के पास होगा।


अंततः क्रिप्स की भारतीय नेताओं से बातचीत असफल हो गई।


क्योंकि इसमें पूर्ण स्वाधीनता की जगह डोमिनियन स्टेटस, संविधान सभा में रियासतों के शासकों द्वारा नामांकित लोगों की मौजूदगी तथा भारत के संभावित विभाजन पर कड़ी आपत्ति थी।


⚜️कैबिनेट मिशन, 1946 (Cabinet Mission, 1946)⚜️


भारत की राजनीतिक समस्या के समाधान के लिये ब्रिटिश सरकार ने एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा। इस मिशन में ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन सदस्य थे लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर। मिशन की मुख्य बातें निम्नलिखित थीं-


ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों को मिलाकर एक भारतीय संघ का गठन किया जाएगा।

विदेश, रक्षा और संचार विभाग संघ के अधीन होंगे और संघ को इनके लिये धन एकत्र करने का अधिकार होगा।


संघ की अपनी कार्यपालिका और विधायिका होगी, जिसमें ब्रिटिश भारत तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


👍महत्त्वपूर्ण तथ्य👍


रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा सन् 1774 में कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई। इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजाह इम्पे (Elijah Impey) थे।


भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिये पृथक् निर्वाचक मंडल अथवा निर्वाचन क्षेत्र का गठन किया गया।


भारत शासन अधिनियम, 1919 मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट पर आधारित था।


भारत शासन अधिनियम, 1919 द्वारा प्रांतों में 'द्वैध शासन प्रणाली' की स्थापना की गई।


भारत शासन अधिनियम, 1919 द्वारा लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।


लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक के रूप में जाना जाता है।


प्रांतों में द्वैध शासन के जनक 'लियोनेल कर्टिस' माने जाते हैं।


1926 में सिविल सेवकों की भर्ती (ली आयोग की सिफारिश पर) के लिये केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।


1927 की साइमन कमीशन की रिपोर्ट और 1928 की नेहरू समिति की रिपोर्ट ने भारत शासन अधिनियम, 1935 की पृष्ठभूमि तैयार की थी।


भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा भारत में संघीय शासन प्रणाली प्रारंभ की गई।


भारत शासन अधिनियम, 1935 द्वारा केंद्र में 'द्वैध शासन प्रणाली' की स्थापना हुई।


भारत में संघीय न्यायालय की स्थापना वर्ष 1937 में भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत की गई थी।


वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के पश्चात् 3 जून, 1947 को भारत के विभाजन की योजना प्रस्तुत की, जिसे 'माउंटबेटन योजना' कहा जाता है।


18 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया।


14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति हुई और समस्त शक्तियाँ दो नए स्वतंत्र डोमिनियनों भारत और पाकिस्तान को हस्तांतरित कर दी गईं।


लॉर्ड माउंटबेटन नए डोमिनियन-भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने। (15 अगस्त, 1947-21 जून, 1948)


लॉर्ड माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू को भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई।


1946 में बनी संविधान सभा को स्वतंत्र भारतीय डोमिनियन की संसद के रूप में स्वीकार कर लिया गया।


स्वतंत्र भारत के प्रथम व अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे। (21 जून, 1948-26 जनवरी, 1950)