संस्कृत क्लास : 02
👉हमने कल अष्टाध्यायी के बारे में पढ़ा था न पाणिनी जी की रचित , तो उसी अष्टाध्यायी के सूत्रों पर महर्षि कात्यायन जी ने वार्तिक लिखा था इसलिए उन्हें वर्तिककार कहते है ।
👉महर्षि पतंजलि ने अष्टाध्यायी के सूत्रों पर एक विस्तृत भाष्य लिखा , जिसे महाभाष्य कहते है , इसलिए महर्षि पतंजलि को भाष्यकार कहा जाता है ।
👉DSSSB TGT में जो प्रश्न आया था उसमें आपने एक नाम सुना आचार्य भट्टोजिदीक्षित जी का इन्होंने अष्टाध्यायी के सूत्रों पर वृत्ति लिखी थी इसलिए इनको वृत्तिकार कहा जाता है।उनकी सबसे प्रसिद्ध और कालजयी कृति 'सिद्धान्तकौमुदी' है।
🟥Fact:- महर्षि पतंजलि द्वारा रचित महाभाष्य में 84 /85 आह्निक है..!!
कुछ विद्वान 84 मानते है कुछ 85 तो थोड़ा सा मतभेद है 😅 बाकी कभी आया तो दोनों नहीं रहेगा एक साथ ऑप्शन में 👍
🟩आह्निक का सरल अर्थ है— "एक दिन का पाठ"
वर्ण विचार..!!
👉सबसे पहले आपके दिमाग में सवाल आना चाहिए वर्ण क्या है ?
✨सबसे पहले तो सामान्य भाषा में अभी जान लीजिए वर्ण और अक्षर एक ही चीज होते है , हम लोग अपने मुंह से जिन ध्वनियों को बोलते है वही वर्ण है , जैसे अ,आ , ई इत्यादि....
🟧एक श्लोक है संस्कृत में___
न क्षरति इति अक्षर:
इसका मतलब हुआ कि जिसका कभी विनाश न हो उसे अक्षर कहते है..!!
वर्ण दो प्रकार के होते है......
१) स्वर ( अच् )
२) व्यंजन ( हल् )
कोष्ठक के अंदर जो लिखा है उसे याद रखिएगा महेश्वर सूत्र में आपको ये दोनों शब्द याद दिलाएंगे दुबारा , बाकी का कल किया जाएगा धीरे धीरे सीखा जाए नहीं तो कल्याण हो जाएगा , दिमाग से बाहर चला जाएगा सब 😅😁

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